अलिफ लैला की कहानी अरब देश की एक प्रचलित लोक कथा है जो पूरी दुनिया में सदियों से सुनी व पढ़ी जाती रही है। यह हज़ार कहानियों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है जिसमें प्रत्येक कहानियां एक फूल की तरह है। इन कहानियों में प्यार सुख दुःख दर्द धोखा बेवफाई ईमानदारी कर्तव्य भावनाएं जैसे भावों का अद्भुत संतुलन है जिसको पाठकों और श्रोताओं को हमेशा लुभाया है। इस कथा के अनुसार बादशाह शहरयार अपनी मलिका की बेवफाई से दुःखी होकर उसका और उसकी सभी दासियों का कत्ल कर देता है और प्रतिज्ञा करता है कि रोजाना एक स्त्री के साथ विवाह करूंगा और अगली सुबह उसे कत्ल कर दूंगा । बादशाह के नफ़रत से उत्पन्न नारी जाति के प्रति इस अत्याचार को रोकने के लिए बादशाह के वजीर की पुत्री शहरजाद उससे शादी कर लेती है । वह किस्सेकहानी सुनने के शौकीन बादशाह को विविध प्रकार की कहानियां सुनाती है जो हज़ार रातों में पूरी होती है । कहानी पूरी सुनने की लालसा में बादशाह अपनी दुल्हन का कत्ल नहीं कर पाता और उसे अपनी बेगम से प्यार हो जाता है । अपनी बेगम की बुद्धिमता से प्रभावित बादशाह औरतों के प्रति अपने मन में उत्पन्न नफ़रत को खत्म करने के अलावा अपनी प्रतिज्ञा भी तोड़ देता है और अंत में अपनी बेगम के साथ हंसीखुशी रहने लगता है।