आज समूची मानव-जाति एक ऐसे नाजुक व निर्णायक मोड़ पर खड़ी है जहां हर ओर केवल उसके विनाश की संभावनाएं ही संभावनाएं दिखाई पड़ती हैं। ऐसे में ‘अल्लाह गवाह है' धर्म-जाति श्रेष्ठ - अश्रेष्ठ के झगड़ों में उलझी मानवता को झकझोर कर जगाने वाली आवाज है। जिसके अनुसार अगर आज प्रत्येक व्यक्ति अपने सारे आग्रह जाति धर्म और राष्ट्र के विशेषणों को छोड़ते हुए स्वयं को श्रेष्ठ मानने का भ्रम त्याग कर केवल सच्चे प्रेम को अपना धर्म बना ले तो पृथ्वी पर एक नये युग की शुरुआत हो सकती है जिससे अवश्य ही प्रेमयुग का आरंभ होगा।