‘धरती अति सुंदर किताब चाँद-सूरज की जिल्दवाली पर खुदाया यह दुख-भूख सितम और ग़ुलामी यह तेरी इबादत है या प्रूफ़ की ग़लतियाँ।’―अमृता प्रीतमअमृता प्रीतम ने भारत विभाजन का दर्द सहा और बहुत करीब से महसूस किया था इसलिए इनकी कहानियों में आप इस दर्द को महसूस कर सकते हैं। इनकी कहानियों में महिला पात्रों की पीड़ा और वैवाहिक जीवन के कटु अनुभवों का अहसास भी पाठक को सहज ही हो जाता है। इनकी कहानियाँ भारतीय समाज का जीता-जागता दर्पण हैं और कहानी के पात्र पाठकों को अपने इर्द-गिर्द ही नज़र आते हैं इसलिए लोकप्रियता के जिस शिखर को इन्होंने छुआ वह केवल इन्हीं के वश की बात हो सकती है।