सोचा ना था कभी लिख पाएंगे। हर शब्द को लिखकर समझाएंगे। बातें तो सभी कर लेते हैं मगर। हम कुछ अलग करके दिखाएंगे। मंज़िलों से हमें क्या है डरना। मंज़िलों से हमें क्या है डरना। जब दिल में हो एक अधूरा सा सपना। हर कोशिश और ख्वाहिश को पूरा कर पाएंगे। तभी तो हम मंज़िल की तरफ़ बढ़ पाएंगे।