गजानन माधव मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ कविता के विविध आयाम विषय पर विस्तृत रूप से लिखने कि इच्छा बहुत दिनों से थी लेकिन समयाभाव और व्यक्तिगत उलझनों के कारण इस ओर ध्यान नहीं दे पा रहा था । वास्तव में गजानन माधव मुक्तिबोध हिंदी साहित्य के प्रख्यात कवि आलोचक और विचारक थे जिनकी लेखनी ने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा के साथ कविता में नई गहराई दी। उनकी रचनाओं में सामाजिक राजनीतिक और अस्तित्ववादी सवालों के गंभीर चिंतन के साथ-साथ एक अद्वितीय संवेदनशीलता दिखाई देती है जहाँ श्रमिक कि आवाज पीड़ा तड़प और चीत्कार मौजूद है । मुक्तिबोध की कविता अँधेरे में उनकी सबसे प्रसिद्ध और चर्चित कृतियों में से एक है जो हिंदी साहित्य के आधुनिक युग का प्रतीक मानी जाती है। यह चर्चित कविता “चाँद का मुँह टेढ़ा है” कविता संग्रह में संकलित है ।