किसी भी कहानी की भूमिका पढ़ना जितना आसान होता है ठीक उतना ही मुश्किल होता है एक नए लेखक की लिए उसकी पहली किताब की भूमिका लिखना। अपनी कहानियों के बारे में ऐसा क्या लिखूँ या कहूँ जो पहले क़िस्सों के संग्रह की बारे में नहीं कही गयी होगी। अक्सर हर छोटी बड़ी कहानी लिखते वक़्त मेरी कोशिश यही होती है की वह दिलों को छू सके। यह कहानी संग्रह इसकी घटनाएँ और इसके सभी किरदार उतने ही सच्चे हैं जितनी आपकी और हमारी ज़िंदगी। 6 अकटूबर 1986 में मुज़फ़्फ़रपुर बिहार के एक मध्यम परिवार में जन्म। शिक्षित माता पिता की अंतिम संतान। आरंभिक शिक्षा प्रभात तारा विद्यालय मुज़फ़्फ़रपुर बिहार से हुई। किरोड़ीमल कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक किया और विश्वविद्यालय के दिनो से हीं समाज सेवा से जुड़ गयी। लिखने का शौख बचपन से ही था समय समय पर अपनी सोंच और अनुभवो को शब्दो में संजोती रही फलस्वरूप कुछ लेख और कविता प्रकाशित भी होती रही। कॉलेज के दौरान नैशनल सोशल स्कीम की प्रेसिडेंट रही और UNESCO के कुछ प्रोजेक्ट पर काम भी किया। 2008 में विवाहोपरांत ब्रिटेन आ गयी और यूनिवर्सिटी ओफ़ ससेक्स से पोस्ट ग्रैजूएट डिप्लोमा किया। उसके बाद पुनः हिंदी लेखन समाज सेवा और राजनीति में सक्रिय हो गयी। 2018 में कंसरबैटीव पार्टी से काउन्सिलर पद पर चुनाव लड़ी और द्वितीय स्थान पर रही। ब्रिटेन की स्थानीय राजनीति में वह आज भी सक्रिय हैं।
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