वीरेन्द्र सारंग का नया कविता संग्रह उनकी कविताओं में से कुछ ऐसी कविताओं का संचयन है जो कृषि किसान जीवन और हमारे पर्यावरण से संबंधित हैं। हालांकि उनके रचनात्मक संसार में कृषि किसान या पर्यावरण कोई अलग ध्रुव नहीं है। हम सबका जीवन चाहे हम जहाँ रहते हों जो भी करते हों इन्हीं पर आश्रित है। हमारे शरीर के भीतर हमारे रक्त की एक-एक बूंद हमारी एक-एक सांस और हमारे शरीर के भीतर दौड़ रहा जल सब इनसे बावस्ता हैं। अपनी कविताओं में सारंग जी इस तथ्य को अनेकशः रेखांकित करते हैं। हमारी कृषि पर हमारे पर्यावरण पर जल जंगल जमीन पर और सबसे बढ़कर अन्न्दाता किसानों के जीवन पर आज शहरीकरण मशीनीकरण और भौतिकतावादी जीवन शैली ने जिस तरह हमला बोल दिया है उसके ख़तरे से भी ये कविताएं सचेत करती हैं।
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