दुनिया में क्या सही है क्या गलत है क्या पाप है क्या पुण्य इन सभी द्वंदो के साथ लिखी गई ग्यारह कहानियां मनुष्य जीवन के विभिन्न आयामों पर लिखी गई है। सिर्फ जो हमे सत्य प्रतीत हो वही सत्य नही होता हो सकता है वह सत्य का अंश मात्र हो। इन्ही आंशिक सत्यो की समष्टि से परम सत्य का निर्माण होता है। जहां एक रूढ़िवादी के लिए समाज में प्रचलित प्रथाएं सही होती है वही एक प्रगतिवादी के लिए सर्वदा समाज में परिवर्तन की गुंजाइश रहती है। इन्ही सभी द्वंदो के साथ दस कहानियां पढ़ने के बाद ग्यारवी कहानी पढ़ने यह कहानी संग्रह उपन्यास का रूप लेता हुआ प्रतीत होता है। अंत में जहां यूनिवर्स एक सुंदर ग्रह पृथ्वी के विनाश से दुखी है वही यह भी प्रतीत होता है की वह सृष्टि में परिवर्तन से खुश है।