प्रस्तुत संग्रह की उल्लेखनीय विशेषता है कि कवयित्री की निजी अनुभूतियों से पाठक तादात्म्य स्थापित कर लेता है। वस्तुत: सार्थक एवं प्रभावी काव्य वही होता है जो कवि के हृदय से निकलकर पाठक के हृदय में यथावत् स्थान पा सके और कवि हृदय का हू-ब-हू आभास करा सके। संग्रह की पहली कविता ''मुझ में एक नदी'' जीवन को परिभाषित करती हुई ऐसी कविता है जो हम सभी के भीतर की नदी की बात करती है। प्रस्तुत कविता नदी के माध्यम से जीवन की कथा कहती है। जैसे नदी के प्रवाह पथ में कभी अनुकूलता आती है तो कभी प्रतिकूलता इसी प्रकार मानव जीवन भी कभी समतल पथ पर चलता है तो कभी दुर्गम रास्तों पर। इन सबको पार करता हुआ वह अपने गंतव्य तक पहुंचता है। जिस प्रकार नदी सागर में समाहित हो जाती है उसी प्रकार मनुष्य उस अनंत से जाकर एकाकार हो जाता है।---डॉ. विद्या सिंह