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About The Book
Description
Author
इस पुस्तक में सूफ़ी दरवेशों के संदेशों को माला के मोतियों की तरह प्रवचन श्रृंखला में पुरोया गया है। सूफ़ी कहते हैं कि परमात्मा को तुमने खोया नहीं है बल्कि तुम केवल उसे भूल गए हो इसलिए परमात्मा को पाना नहीं है केवल उसे याद करना है स्मरण करना है। सूफ़ी इसे ‘ज़िक्र’ कहते हैं। हिन्दू इसे ‘सुरति’ और बौद्ध इसे ‘स्मृति’ कहते हैं। बस स्मरण भर करना है। यह तुम्हारा ही स्वभाव है फिर पूछने की ज़रूरत क्या? यदि तुम नहीं भी पूछो फिर भी वह तुम्हारा ही है।