मैं अनिष मौर्य अपनी पहली किताब अंततः कविता संग्रह को आपके बीच में प्रस्तुत कर रहा हूं। प्रकृति का स्मरण करते हुए सभी कविताओं को पूर्ण रूप से सजाया गया है मैंने कठिन परिस्थितियों में आए दुख को अपने शब्दों के रूप में उन्हें सुख की ओर ले जाने का प्रयास किया है। संसार के बोझ (दु:ख) को अपने शब्दों में पिरोकर प्रकृति और संसार के लोगों से ही सीखते हुए उन्हें कविताओं में कैद कर संसार में प्रेम को फैलाने का छोटा सा प्रयास है। प्रेम को बचाना अंततः इस संसार रूपी गमले में हम सब लोगों के रूप में लगे पौधों को प्रेम रूपी जल से सींचकर ही बचाया जा सकता है। साथ ही मैने आज कल के नवयुवकों/नवयुवतियों के जीवन मे घर की जिम्मेदारियों भविष्य और प्रेम को लेकर चल रहे मानसिक तनावो और उनसे बचने के कई आसान उपायों के विषय मे लिखा है जो की मैने स्वयं अपनाये है।