अंजली मिश्रा यह नाम साहित्य जगत में नया है लेकिन इनकी लेखनी विगत कई वर्षों से साहित्य की सेवा में लगी हुई है। विभिन्न समाचार पत्रों में सामाजिक विषयों पर इनके लेख छपते रहते हैं। ‘अनुमिता’ उपन्यास पाठक को जहाँ 90 के दशक वाले प्यार और उसकी कसक से परिचित कराता है वहीं नई पीढ़ी को जीवन में प्रेम की प्रासंगिकता से भी अवगत कराता है। जीवन की आपाधापी में समाज के बनाए नियमों को मानते हुए अपना जीवन व्यतीत करना बहुत कठिन होता है। बहुत सारे उतार-चढ़ाव पारिवारिक ग़लतफ़हमियाँ और दो प्यार करने वालों के बीच ज़िद की दीवार खड़ी दिखाई देती है। इस उपन्यास में सिद्धांत का अनुमिता के लिए एकतरफ़ा प्यार और अनुमिता का सिद्धांत के लिए छुपा हुआ लगाव पाठकों में अनजाने ही एक सुखद अहसास भर देता है और दोनों को मिला देने की उत्कंठा भी। मध्यम परिवार में जन्मी हर लड़की खुद को अनुमिता की जगह पाएगी।