प्रेम बहुत खूबसूरत है। जब वह पूरा हो जाए तब भी लेकिन जब पूरा न हो तब कहीं ज़्यादा खूबसूरत। कहा यह भी जाता है कि सच्चा प्रेम कभी पूरा नहीं होता। यह स्वयं अपूर्ण होते हुए भी पूरी दुनिया को पूर्ण करने की क्षमता रखता है। अधूरे प्रेम में अनेक बार विशाल इबारत गढ़ी गई हैं। ऐसे ही एक अधूरे प्रेम में रची गई यह पुस्तक ‘आपके जाने के बाद’ आपके हाथों में है। इस पुस्तक में विरह के स्वर अधिक हैं। जो आपको केवल निराश नहीं करते बल्कि प्रेम के खूबसूरत और बेशकीमती अहसासात से आपको मिलवाते भी हैं। यहाँ मिलन भी है और विरह भी दर्द भी है और राहत भी अश्क भी हैं तथा मुस्कान भी बेचैनी भी है और सुकून भी बादशाही भी है और फकीरी भी। कहने का अर्थ है कि इन ग़ज़लों में वो सब मिलेगा जो कि एक प्रेम की अभिव्यक्ति में होना चाहिए।