अपराधी एक ऐसा उपन्यास है जिसमें पराधीन काल में पुलिस द्वारा रस्सी का साँप बनाए जाने की गाथा उकेरी गई है। यह ठाकुरों के जमाने की कहानी है। इसमें ठाकुरों की ईर्ष्या द्वेष का भी चित्रण है और पुलिस की मनमानी और सज्जन आदमी को भी अपराधी ठहराने के हथकंडों की दास्तान है। यह पुस्तक रोंगटे खड़े कर देने वाली ऐसी कहानी बयां करती है जिसे पढ़कर हर कोई सिहर उठेगा। लेकिन एक बार पढ़ना शुरू करेगा तो पाठक इसे पढ़कर ही दम लेगा।
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