आराध्य’ 40 लघु कथाओं का संग्रह है। छोटी घर की विरासत नन्दी जैसी अन्य लघु कथाएं समाज/ परिवार में व्याप्त फरार ऊंच-नीच अशिक्षा कुप्रथाओं असमानता पर करारा प्रहार करती हैं तो पानी बेटे की चाह में आहुति- मानवीय लालसा और कमजोरियों व्यवस्था पर आघात करती हैं। हर स्तर पर यदि माफिया न होते तो रोटी वाली अपना गिरोह संचालित नहीं कर पाती। सुविधाभोगी बन चुका इंसान अपनी औकात अतीत को टपकती छत की तरह भूल जाता है। व्यंग्य भीड़तंत्र के धाम में राजनेताओं के आचरण को पिरोने की कोशिश की है। बन्द मुट्ठी ले तेरा रजिस्टर आ गया में शिक्षा की दुरावस्था का प्रकट करके शासन को चेताया है। पंगत महामारी के मारे लघु कथा कोरोना काल में आए सामाजिक नैतिक धार्मिक बदलाव को जीवंत करती हैं। समर्पण वसंत झोपड़ी ढांचा में आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की नैसर्गिक अपील संघर्ष को पिरोया है। डिग्री में ज्ञान योग्यता अनुभव की महिमा का यशोगान सरकारी दामादों को निचोड़ता है। नागिन डाल से कटी डंक पापा की परी कथा में संपत्ति का लालच भूखी औरत के पारिवारिक षड्यंत्रों की बलि चढ़ाए गए बुजुर्ग बाप निर्दोष भाई की कानूनी बेजारी का सार संक्षेप समेटा है। हर लघु कथा कानून से मिले वरदान को उत्पीड़न धोखे छल प्रपंच में बदलने का जीवंत दस्तावेज है।