“अरदास अभ्युत की” शांति से उदय की ओर रचना का जितना विचार मैंने मन ही मन किया उतना ही यह कार्य अत्यन्त गुरुत्वपूर्ण एव दुसाध्य जानकर मैं दुविधाजनक हुई। इस प्रकार के अदृष्टपूर्व देवचरित्र के मर्म उद्घाटन के लिए जैसी अन्तर्दृष्टि और शब्द निपुणता की आवश्यकता है उसका यहाँ लेशमात्र भी नहीं है। तथापि माँ सरस्वती की असीम कृपा से मैं इस कार्य में अग्रसर हुई हूँ। परम पिता परमात्मा की अनुकंपा से शुद्धचित व सरलतापूर्वक मैं अभ्युतन्वी यह प्रकृति का अनमोल रत्न आज आप के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ और आशा करती हूँ कि अरदास अभ्युत के माध्यम से आप सभी के जीवन में मंगलता का संचार हो। अरदास अभ्युत को शब्दों के माध्यम से जीवित करने के लिए मैं अपने गुरुजनों व परिवार के सदस्यों के साथ-साथ प्रकृति माँ के उस अद्वितांश का धन्यवाद करना चाहती हूँ जिन्होंने हर पल मुझे मेरे शब्दों गूँज को सुनने व लिखने का साहस दिया। - अभ्युतन्वी