इस संग्रह में 11 कहानियाँ प्रकाशित की जा रही हैं। इन कहानियों में जग है आप हैं और मैं भी अर्थात आपबीती और जगबीती दोनों ही तरह की कहानियाँ आपको पढ़ने को मिलेंगी। इन कहानियों के कथ्य पर जहाँ समसामयिक सामाजिक परिस्थितियों और काल का प्रभाव है तो कहानियों को लिऽते समय मूल भावना यही रही है कि समाज में घटित सामाजिक समस्याओं को मात्र उठाया ही न जाए बल्कि उन पर विमर्श के माध्यम से समाज में जागृति का बिगुल बजे और सकारात्मक परिवर्तन का परिवेश निर्मित हो। --कश्मीर सिंह