अगर एक व्यक्ति खुद पर विश्वास रखे तो सब ठीक चल सकता है। उसके अन्दर का डर ही है जो उसे कमज़ोर बनाता है। अपने अन्दर भी मैं यही सब टटोलने लगा क्यों कि मैंने भी अपने करियर में सब कुछ देखा। अपने उसी दिन को याद किया जब मेरी नौकरी चली गई थी और उस दिन से आज तक मेरी एक नई ज़िन्दगी रही। सब कुछ बदल गया था। दिमाग़ मे जो टेंशन का भंवर बनता था वह खत्म हो गया। बस अब एक ही टेंशन है कि जीना है। कुछ करने के लिए। ये ज़िन्दगी मिली है कुछ करना है। आप को पता है एक व्यक्ति का सब से रिलैस्क्ड दिन कौन सा होता है? जब आप एक जॉब से रिज़ाइन करते है। कभी महसूस किया है क्या। नहीं न लेकिन मैंने किया है कई बार। --- आप पिछले 25 वर्षों से रेडियो टेलीविजन रंगमंच के सक्रिय कलाकार रहे हैं। इन्हें लघु फिल्मों के निर्देशन और भूमिकाएँ निभाने का काफी अनुभव है। वर्तमान में इनका एक यूट्यूब चैनल मनराज टाकीज़ के नाम से चल रहा है। अनिल जी आवाज़ की दुनिया के एक मंझे हुए कलाकार हैं और इन्होंने बहुत सी कॉरपोरेट फ़िल्मों और डॉक्युमेंट्रीज़ को आवाज़ दी है। इन्हें रेडियो निर्देशक एवं प्रोडूसर के रूप में 2000 से अधिक रेडियो प्रोग्राम देने का श्रेय जाता है। आकाशवाणी के एप्रूव्ड ड्रामा आर्टिस्ट और कैजुअल एनाउंसर भी रहे हैं। Essentials & Practices of Radio Management किताब भी इन्होंने लिखी है। इन्हें रेडियो दुनिया द्वारा बेहतरीन रेडियो प्रोग्राम के लिए भी नवाजा गया है। ‘रुके-रुके से क़दम’ डॉक्यूमेंटरी के लिए इन्हें बेस्ट कॉन्सेप्ट अवार्ड भी मिला है। आप नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन के एप्रूव्ड क्रिएटिव डायरेक्टर भी रह चुके हैं।