आज़ादी इन्सान का सबसे बड़ा सपना रही है। लेकिन आज़ादी के मायने क्या हैं? आज़ादी और जि़म्मेदारी का सह-संबंध क्या है? जो कुछ हमने जाना है अनुभव किया है जो धारणाएं हमने संजो रखी हैं जो शास्त्र-प्रमाण हमने अपने भीतर गढ़ लिए हैं क्या उस सबसे आज़ाद हुए बिना सृजन संभव है? ‘आज़ादी की खोज’ इन्हीं प्रश्नों की व्यापक विमर्श-यात्रा है। जे. कृष्णमूर्ति आज़ादी की अर्थवत्ता को नए आयाम देते हैं और उसे हमारे दैनिक जीवन से जोड़ देते हैं। तब यह यात्रा केवल बुद्धिविलास बन कर नहीं रह जाती प्रायोगिक धर्म बन जाती है जिसे हर कदम पर आज़माया जा सकता है आज़माया जाना चाहिए।