‘बाबा’ शीर्षक इस पुस्तक में कुछ लघु कथायें पाठकों के लिये प्रस्तुत है। सभी कथायें हमारे आम जीवन में घटित घटनाओं से प्रेरित हैं। कुछ कथायें सामाजिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं जैसे पहली मार्मिक कथा ‘बाबा’ एक ऐसे जीवंत चरित्र के बारे में है जिसे आज के आधुनिक काल में कल्पना करना भी कठिन है वहीं ‘आह्लादित चेहरा’ एक पिता की प्रसन्नता को वर्णित करती उस समय की कहानी है जब उसके पुत्र को सम्मानित किया जा रहा था। कहते हैं कि संतो की वाणी में एक आर्कषण होता है इसे सिद्ध करती ‘जुनून’ कहानी है जिसमें एक परिवार में हुये आमूल परिर्वतन को बताया गया है।