Bachchon Ki Mahafil
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About The Book

मैं मूलतः एक शिक्षक रहा हूं बच्चों के बीच रहकर उनकी भावनाओं का अवलोकन कर उनके हृदय में बैठने का अपने स्तर पर हमेशा से प्रयास करता रहा हूं ।कहानी लेखन विद्यालय के छात्रों के लिए एकांकी लेखन एवं प्रहशन मेरा विषय रहा है जिसमें समाज के ज्वलंत प्रश्नों को उठाकर शिक्षाप्रद समाधान देने के लिए सतत प्रयत्नशील रहा हूं।मेरी बहुत दिनों से इच्छा थी की बच्चों के लिए कविता लिखूं पर व्यर्थ कल्पनाओ में उड़ान भरना मुझे बेमानी लगा बहुत मंथन के पश्चात मैंने निश्चय किया कि कुछ उपेक्षित वस्तुओ को अपनी कविता के विषय के रूप में लूं जिनसे बच्चे परिचित तो है किंतु सामान्यतः उस पर ध्यान नहीं देते हैं।मेरे स्वयं के बच्चे जब छोटे छोटे थे तब मुझसे सवाल करते थे कि इस कीड़े का क्या नाम है? इस पशु पक्षी का क्या नाम है? इसको क्या कहते हैं ?मैंने सोचा कि इन बच्चों के समान ही बहुत से बच्चे होंगे जो हमारे घर के आसपास रहने वाले जीव जंतुओं से और अन्य वस्तुओं से अपरिचित होंगे।कविता के लिखते समय मुझे बड़ी असमंजस स्थिति का सामना करना पड़ा जहां एक ओर विशेष सामाग्री को ध्यान में रखकर शिक्षाप्रद बातें रखनी थी तो दूसरी ओर साहित्यिक परंपराओं का निर्वहन करना था। मैंने कविता की कसौटी को गोढ़ मानना ही उचित समझा और विषय सामाग्री के प्रस्तुति करण पर जोर देना ही बेहतर माना। इसलिए इस कविता संग्रह को उच्च साहित्यिक मापदंड से मापना ठीक नहीं होगा ।मेरा वास्तविक उद्देश्य इसे शैक्षणिक सामग्री के रूप में प्रस्तुत करना है जिसके बारे में बच्चों की जानकारी बड़े और अपने आसपास के पर्यावरण के प्रति भी चेतना जागृत हो।बच्चों की महफिल को आप तक पहुंचाने में आदरणीय डाश्री अखिलेश पालरिया जी सेवा निवृत प्रमुख चिकित्सा अधिकारी अजमेर राजस्थान का विशेष आशीर्वाद योगदान रहा है मैं उनको हृदय से धन्यवाद आभार व्यक्त करता हूं।
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