इस दुनिया में ना कोई हिन्दू है ना कोई मुसलमान ना सिख और ना ईसाई सभी पहले एक मानव हैं और मानवता ही सबका धर्म है। प्रत्येक व्यक्ति मानवरूपी धर्म को आलिंगन दे तो क्या उसका जीवन ज्ञानरूपी खुशियों से नहीं भर जायेगा? जब-तक आप जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं निर्धारित करते हैं तब तक आप जान ही नहीं पाते हैं कि इस जीवन का उद्देश्य क्या है। भ्रमित होकर जीवन को निराशा की ओर जाते हैं और वहां दुखों के सागर में खो जाते हैं