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About The Book
Description
Author
इस दुनिया में ना कोई हिन्दू है ना कोई मुसलमान ना सिख और ना ईसाई सभी पहले एक मानव हैं और मानवता ही सबका धर्म है। प्रत्येक व्यक्ति मानवरूपी धर्म को आलिंगन दे तो क्या उसका जीवन ज्ञानरूपी खुशियों से नहीं भर जायेगा? जब-तक आप जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं निर्धारित करते हैं तब तक आप जान ही नहीं पाते हैं कि इस जीवन का उद्देश्य क्या है। भ्रमित होकर जीवन को निराशा की ओर जाते हैं और वहां दुखों के सागर में खो जाते हैं