ऋषि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत भी रामायण की तरह विश्वसाहित्य की अमूल्य कृति है। इसमें वर्णित भारतीय सभ्यता और संस्कृति आज के जीवन में भी प्रासंगिक हैं। महाभारत में कौरवों-पांडवों के प्र संघर्ष को चित्रित किया गया है। यह जीवन के नैतिक पहलूओं पर भी प्रकाश डालता है। इसमें वर्णित पात्र साधारण मनुष्यों की तरह स्नेह दुविधा आत्मसम्मान आदि भावनाओं से युक्त हैं। श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को युद्धभूमि में दिया उपदेश आज भी उपयोगी है। बाल महाभारत में महाभारत की कथा को सरल सरस भाषा में प्रस्तुत किया है ताकि किशोरवय के बालक-बालिकाएँ भी इसे सहज रूप से ग्रहण कर सकें। बाल महाभारत में सर्वप्रथम वर्णन है कि वेदव्यास नाम के ऋषि सदैव भिन्न-भिन्न विषयों पर चिंतन-मनन किया करते थे। एकदा उनके मस्तिष्क में एक कथा विकसित हुई जो एक राजा उनके राज्य और परिवार के विषय में थी। इस कथा में कई युद्धों का वर्णन आता है जो राजाओं और उनके पुत्रों द्वारा लड़े गए थे। इस कथा में सुंदर श्लोकों द्वारा वीर-साहसी नर-नारियों का चरित्र वर्णित है। महाभारत मुख्यत पांडु और धृतराष्ट्र नामक दो क्षत्रिय राजाओं की कथा है। वेदव्यास जी ने महाभारत की शिक्षा सर्वप्रथम अपने पुत्र शुक को दी थी। महाभारत की कथा भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। कथा का आरंभ हस्तिनापुर के राजा शांतनु से किया है तत्पश्चात विभिन्न पात्रों—देवव्रत धृतराष्ट्र पांडु द्रोण लाक्षागृह कर्ण दी आदि के बारे में बताया गया है। अंत में युधिष्ठर का माता कुंती दी और सब भाइयों के साथ स्वर्ग में प्रविष्ट होने का वर्णन है। इसमें महाभारतकालीन भारत का मानचित्र भी दर्शाया गया है। पुस्तक के अंत में महाभारत के मुख्य पात्रों का परिचय दिया गया है और बालक-बालिकाओं की सुविधा के लिए विषयवस्तु से संबंधित शब्दार्थ तथा प्रश्न भी ;आपको कितना याद है शीर्षक के अंतर्गत दिए गए हैं। तत्कालीन समाज से जुड़े शाश्वत जीवन-मूल्य भी इसमें परिलक्षित होते हैं जैसे — सत्यनिष्ठा कर्तव्यपरायणता आदि।.