किताब का विवरण: उपन्यास बलवा नब्बे के दशक में लगातार होने वाले बलवों और उसके पीछे के बाहुबलियों की जबरदस्त कहानी है। एक तरफ धर्म के ठेकेदार मौलाना मुश्ताक - पं. संकठा प्रसाद समाज के ताने-बाने को अपने स्वार्थो की बलि चढ़ाने के लिए हिंसा-खून खराबा और आतंक का शातिरी शुतुरमुर्गी षडयन्त्र दिखेगा तो वहीं पुनीत-मुशीर जैसे नौजवान अमन और इन्साफ के लिए अकेले संघर्ष करते नजर आयेंगें। गजाला मौलाना मुश्ताक से बगावत कर पुनीत के साथ अमन के आस की अलख जरूर जगाती है पर समाज उनका साथ नही देता। पुलिस-प्रशासन का नकारात्मक-घुटना टेकू चरित्र तो कुछ पुलिस-प्रशासनिक अफसरों का सकारात्मक पहलू भी आप को बलवे की हकीक़त का एहसास कराएगा। बलवा जरूर नब्बे के दशक की घटनाओं पर आधारित कहानी है पर आज भी समाज ऐेसे चरित्रें घटनाक्रमों से अछूता नहीं है। About the Author श्री मुख़्तार अब्बास नकवी भारतीय संस्कृति साहित्य एवं सियासत के संगम का ऐसा व्यक्तित्व हैं जिन्होंने तमाम व्यस्तताओं के बावजूद साहित्य एवं लेखन से अपने को जोड़ कर रखा है। सादगी मिलनसार एवं संस्कारी व्यत्तिफ़त्व के धनी श्री मुख़्तार अब्बास नकवी समय-समय पर अपनी धारदार लेखनी से देश-दुनिया के रोमांचक सामाजिक सरोकार के अनछुए पहलुओं को अपनी रचनाओं की सुन्दर माला में पिरोकर पाठकों के सामने लाते रहे हैं। उपन्यास ‘बलवा’ लेखक की अद्भुत रचना है आप के सामने उनका यह नया उपन्यास प्रस्तुत है।
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