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About The Book
Description
Author
नई कहानी' आंदोलन के दौर में अपनी कहानियों के स्वर और दृष्टि की विशिष्टता की वजह से बहुचर्चित और बहुप्रशंसित रहीं उषा प्रियंवदा आज हिंदी कहानी की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। हिंदी कहानी की विशेषता पर होने वाली किसी भी तरह की चर्चा इनकी कहानियों के ज़िक्र के बगैर लगभग अधूरी है। बिना किसी तरह की नारेबाजी के उषा जी अपनी कहानियों में अपनी पक्षधरता जिस सादगी से अभिव्यक्त करती हैं वह अपने आप में एक मिसाल है। व्यक्ति और परिवार परिवार और समाज के अंतर्संबंध की विसंगतियों और विडंबनाओं को जितनी सूक्ष्मता से उषा प्रियंवदा ने चित्रित किया है उतनी ही व्यापकता में उन्होंने व्यक्ति के बाहा और आंतरिक संसार के बीच के संबंध को भी उकेरा है। आजादी के बाद के भारत के बदले हुए मानसिक और सामाजिक परिवेश को हम उषा जी की कहानियों में देख और महसूस सकते हैं। __ उषा प्रियंवदा के समग्र लेखन में से 13 श्रेष्ठ कहानियों का यह चयन उनकी मानवीय संवेदनाओं और सरोकारों का प्रतिनिधित्व करने वाला है साथ ही साथ यह उनकी कहानी-कला के विकास का भी अनूठा दस्तावेज़ है।