हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुधाकर अदीब ने अपने विशिष्ट उपन्यासों द्वारा अपनी सशक्त लेखनी का लोहा मनवाया है। श्रीराम के अनुज लक्ष्मण के दृष्टिकोण से रामकथा पर आधारित उनका बहुचर्चित उपन्यास - ''मम अरण्य'' संत कवयित्री मीराँबाई के संघर्षमय जीवन और तत्कालीन राजपूताने के इतिहास पर आधारित उनका सुप्रसिद्ध उपन्यास - ''रंग राची'' अपने शास्त्रार्थ एवं पुरुषार्थ द्वारा सनातन हिन्दू धर्म के पुनरुद्धारक जगद्गुरु आदि शंकराचार्य के जीवन पर आधारित दुर्लभ उपन्यास - ''महापथ'' उनकी बहुमूल्य कृतियाँ हैं। उन्होंने मध्यकालीन भारत के लोककल्याणकारी अफ़ग़ान शासक शेरशाह सूरी पर ''शाने तारीख़'' तथा आधुनिक भारत राष्ट्र के निर्माता सरदार पटेल तथा भारतीय स्वाधीनता आंदोलन पर ''कथा विराट'' जैसे वृहद ऐतिहासिक उपन्यास भी हिन्दी साहित्य जगत को दिये हैं। निकट अतीत में कश्मीर घाटी में हुए कश्मीरी हिन्दुओं के त्रासद विस्थापन और नरसंहार पर लिखा गया उपन्यास ''बर्फ़ और अंगारे'' भी उल्लेखनीय हुआ है। इसके अतिरिक्त उनके प्रारंभिक तीन उपन्यास ''अथ मूषक उवाच'' ''चींटे के पर'' और ''हमारा क्षितिज'' भी कोई कम चर्चित नहीं रहे हैं। अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से समादृत लेखक सुधाकर अदीब चार कविता-संग्रह चार कहानी-संग्रह एक आलोचनात्मक ग्रंथ ''हिन्दी उपन्यासों में प्रशासन'' और कई अन्य सम्पादित कृतियों के भी सर्जक हैं। ''बारह आत्मकथाएँ''। इस उपयोगी समीक्षात्मक आत्मकथा-संकलन में लेखक ने हिन्दी के जानेमाने साहित्यकारों - वृंदावनलाल वर्मा अमृतलाल नागर डॉ. रामदरश मिश्र डॉ. कुसुम अंसल मन्नू भंडारी चन्द्रकान्ता मुद्राराक्षस चन्द्रकिरण सौनरेक्सा सुशीला टाकभौरे डॉ. महीप सिंह और डॉ. निर्मला जैन की आत्मकथाओं को बहुत गहनता से विचार कर अत्यंत सरसता के साथ प्रस्तुत किया है।