किसी ने कहा कि मैंने अच्छी कविता लिखी है तो मैं कहूँगी उस अच्छी कविता ने मुझे चुना है। मैं कविता नहीं लिखती। कविता तो मेरे अंदर रहती है। कभी-कभी बाहर आने की ज़िद पे अड़ जाती है। तो जब जब कविता ने ज़िद की मैंने उसे स्याही का रास्ता दिया। उसी रास्ते पर मिली कविताओं कों बटोर कर मैंने आपके सामने रखा है। जो पसंद ना आए वो मेरा जो पसंद आया वो कविता का। क्योंकि चाहे कुछ भी हो कविता तो रहेगी। और अगर कविता है तो मैं हूँ। तो मुझे मिला एक बारिश का पन्ना लफ़्ज़ों में भीगा हुआ।