वख्त बे वख्त-कुछ आज की बातें कुछ बीते हुए पल-बीते हुए लोग और कुछ बीती हुई बातों से जब गुजरा समय मन को छू जाता है तब जुबाँ खामोश रहती है और बंद आँखें बीता वख्त देखने लगतीं हैं बस उन्ही यादों को-लोगों को-पलों को शब्दों में ढालने का एक प्रयास भर है………….