‘बेखौफ गुस्ताखियां’..... वो शायद इसलिए कि जो भी मैं लिखती हूँ कभी भी किसी से डर कर नहीं लिखती। जो कभी पहले लिखा था सबने सराहा प्यार दिया। उस पुस्तक को भी मैंने ईमानदारी से लिखा क्योंकि हर वस्तु जिसमें ईमानदारी हो वह हमेशा रहती है। ‘बेखौफ गुस्ताखियां’ में भी कविता के नए आयाम नजर आते हैं। इसमें मैंने वही लिखा जो लिखने का मन हुआ बस जो कहा या लिखा दिल से लिखा बेखौफ होकर बिना डरे। जब हम प्रशंसा करते हैं तब हम अपनी लेखनी के प्रति ईमानदार नहीं होते। हमें हमेशा लेखनी में ईमानदारी दिखानी चाहिए। एक कलाकार अलग होता है क्योंकि उसमें निडरता का साहस होता है जो उसे भीड़ से अलग रखता है। विचारों का समुद्र सभी के पास है किन्तु सच का अहसास केवल कलाकार के पास होता है और यह लाज़मी भी है। विचारों के बेखौफ झुंड एक नए बदलाव को लाते हैं नई दिशा को जन्म देते हैं। स्वार्थ से भरी इस दुनिया में अपनी पहचान कहीं पीछे छूट गई है जिसमें आपको अपनी पहचान की चरम सीमा नजर आएगी। शब्दों की सादगी भावनाओं का संगम और रसों का उत्साह यह सभी मेरी कविता की रूपरेखा है जो मेरी कविताओं का मूल आधार है। हर शब्द में छुपी अनजानी सच्चाई नजर आएगी।यह पुस्तक मेरी भावनाओं और विचारों का परिणाम है। आशाओं की दुनिया में उम्मीद भी बड़ी होती है पूरी तभी होती है जब आप इसे पढ़कर अच्छे या बुरे विचार रखते हैं। उम्मीद अच्छे की है क्योंकि मैं सकारात्मकता में विश्वास रखती हूँ और ईमानदार भी हूँ। धन्यवाद सभी को जिन्होंने प्रेरणा दी हिम्मत दी। यह पुस्तक विविध रंग-बिरंगे जीवन के चेहरे दिखाती है। विचारधाराओं को जब लम्बी उड़ान भरना होता है तो सब चकित रह जाते हैं और गौरवान्वित भी होते हैं।