बनारस की विभा पाठक अपनी माँ सुषमा पाठक के कुशल गृहिणी होनें व पिता ओमकेश पाठक के कृषक होनें को बहुत गर्व से बताती हैं। विभा का लिखा अखबारों पत्रिकाओं में आता ही रहता है। इंस्टाग्राम पर दस हजार से अधिक फाॅलोवर्स तो हैं ही इनकी कविताओं पर रील बनाने वाले भी बहुत हैं। कविताओं का विषय समाज की कुरीतियों के तीव्र विरोध का रहता है। हाशिए के समाज को साहस हिम्मत देनें के लिए दिनो-रात समर्पित हैं।