औपनिवेशिक काल में भारत का इतिहास सामाजिक आर्थिक धार्मिक व राजनैतिक परविर्तनों से गुजरा है। इस समयान्तराल में इस उप महाद्वीप ने जहॉ अहिंसावादी महात्मा गांधी और क्राँतिकारी भगत सींग जैसी विश्व विभूतियों को जन्म दिया वहीं सामाजिक परिवर्तनात्मक घटनाओं को जन्म दिया। प्राचीनकाल से विद्यमान विविधता व अनिकेता ने भारतीय समाज में ऐसे विरोधाभसों एवं विसंगतियों को जन्म दिया जो कालांतर में भारतीय समाज का अभिन्न अंग बन गई। चिन्तन विश्वास एवं आचरण के प्रायः सभी पक्षों में असंगति व अन्तर्विरोध भारतीय समाज में आसानी से देखे जा सकते है। अस्पृश्यता इनमें से एक है।