यह पुस्तक ‘भाव अनुग्रह’ मेरी पिछली दो पुस्तकों ‘भाव संग्रह’ एवं ‘भाव विग्रह’ के लिये आप द्वारा दिये गये प्यार और आशीर्वाद के फलस्वरूप संवेदनाओं का एक संकलन है। इसमें निहित कविताओं को मैं जब भी पढ़ता हूँ ऐसा लगता है जैसे आप सभी ने अपने प्यार से मेरी झोली भर दी है।आपके इस स्नेह के लिये आप सभी को हृदय से कोटि-कोटि धन्यवाद! मैंने कोशिश की है कि इस ‘भाव अनुग्रह’ के माध्यम से प्रकृति के हर पहलू को छूते हुए मनुष्य के जीवन की यात्रा की विभिन्न परिस्थितियों को आपके सामने रखूँ और आपको भक्ति भाव में भी डुबो सकूँ। आपके प्यार ने मुझमें इतना साहस भर दिया है कि मैंने एक कविता के माध्यम से काल को भी चुनौती दे डाली है।किन्तु दोस्तों समय बहुत ही मूल्यवान और बलवान होता है। उसके महत्व को यहाँ प्रदर्शित करने की भरपूर कोशिश की गई है। इस पुस्तक या इसकी किसी भी कविता या प्रसंग से किसी भी व्यक्ति विशेष या समुदाय या संस्था को किसी भी प्रकार का ठेस पहुँचाने या निन्दा करने या किसी कमी को उजागर करने का कोई भी प्रयोजन या अभिप्राय नहीं है बल्कि अच्छाइयों की सम्भावनाओं को तलाशने का एक सुन्दर प्रयास है। मानव भावनाओं को विभिन्न रूपों में प्रदर्शित करने एवं आप तक पहुँचाने की एक कोशिश की गई है। फिर भी यदि किसी को किसी प्रकार की ठेस पहुँची हो तो हृदय से क्षमा चाहता हूँ। आशा है इस पुस्तक ‘भाव अनुग्रह’ के माध्यम से आप सभी मेरा अनुरोध अवश्य स्वीकार करेंगे और हमेशा अपने प्यार और आशीर्वाद से मुझे अनुगृहीत करते रहेंगे।धन्यवाद!राजेन्द्र प्रसाद सिंह
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