जीवन की संध्या बेला में पुरानी डायरियों के पन्नों को पलटकर देखा तो लगा कि इनमें तो जीवन के हर पहलू के अनुभव भरे हुए हैं। मुझे याद आया कि इन अनुभवों से मिली सकारात्मक ऊर्जा ने हमेशा मुझे सही-गलत का भेद बताया फूलों के मोह-पाश में फँसने से बचाया और काँटों की पीड़ा को सहना भी सिखाया। शायद यही राज है अपने सिद्धांतों पर अडिग रहकर संतुलित जीवन जीने का। अब एक कर्तव्य भाव से इन अनुभवों के संचित मोती सीख के धागे में पिरोकर सबसे साझा करने की इच्छा है।मेरा प्रथम पुष्प कविताओं का संग्रह है जिसे मैंने अपने आदर्शों और पूजनीय अपनों को समर्पित किया है। द्वितीय पुष्प पर मैं कार्यरत हूँ जो उन घटनाओं के संस्मरण पर आधारित है जिन्होंने मेरे जीवन पथ को संवारा। इसके अतरिक्त नानी-दादी की भूमिका में रचित उन कहानियों को भी साझा करने का विचार है जिन्होंने मेरे प्यारे बचपन को वापिस लौटा दिया।आप सभी के प्रोत्साहन की आकांक्षा मेंअरुणा चाबामो.: 9899778200ई-मेल: arunachaba@gmail.com
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