ज़िंदगी हर पल नए भाव से भरी हुई होती है ऐसा नहीं होता किसी भी पल कि हमारा जीवन भाव शून्य हो जाए। दिमाग़ कुछ ना कुछ सोचता रहता है महसूस करता रहता है और यही भाव हमारे दिल में उतर कर कलम को अपना साथी बनाते हैं अल्फाज़ बन कर कागज़ पर उतरते हैं उस वक़्त आँखें भी रो कर हमारा साथ देती हैं। भाव तो गुज़र जाते हैं पर अल्फाज़ शाश्वत हो जाते हैं... इस समय की धारा में भाव की कश्ती में सवार। इसी कश्ती में सवार हो कर मैंने भी समय की धारा में सफर करते हुए अपने भावों को अल्फाज़ के रूप में ढालने की एक छोटी सी कोशिश की है। उम्मीद है इसी कोशिश में कहीं पर आपको भी महसूस हो कि इस कश्ती मे आप भी सवार हुए हैं।