BHAGAT SINGH AUR PASH : ANDHIYARE KA UJALA

About The Book

जो अँधियारे का उजाला है वह गतिशील है। वह अँधियारे से पंजे लडा़ता है। वह ऐसी रोशनी पैदा करता है जिससे अँधियारा कटता-छँटता है और हमें आगे बढ़ने की राह मिलती है। इस किताब में ऐसी ही शख्सियतों के जीवन विचार उनके जद्दोजहद से हमने रू ब रू होने की कोशिश की है। कई ऐसे साथियों के बारे में भी है जो हमारे सहयात्री सहयोद्धा रहे हैं। उनसे बहुत कुछ सीखा है। उनमें कई अब साथ नहीं हैं पर अपने काम और विचारों से आज भी वे हमारे बीच हैं जीवित हैं। इसलिए उन पर लिखी टिप्पिणयाँ मात्र स्मृति लेख नहीं हैं। इनमें यादें हैं संस्मरण हैं उनकी रचना व विचार यात्र है और इसके माध्यम से अपने समय की पहचान है। ऐसे ही लेखों व टिप्पणियों से मिलकर बनी है यह किताब ‘अँधियारे का उजाला’। यह दूसरी आवृति है। इसमें कुछ नये आलेख शामिल किये गये हैं। इस किताब पर पाठकों और मित्रें की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा। -कौशल किशोर
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