भगवान बुद्ध सिद्धार्थ गौतम ने लगभग 2500 साल पहले धम्म (पालि में धर्म) का मार्ग दिखाया। उन्होंने जीवन के दुखों और उनके कारणों को समझा और उनसे मुक्ति पाने का उपाय बताया। उनके धम्म का मूल चार आर्य सत्य हैं: दुःख है दुःख का कारण है दुःख का निरोध संभव है और दुःख निरोध का मार्ग (अष्टांगिक मार्ग) है।बुद्ध का धम्म किसी ईश्वर की अवधारणा पर आधारित नहीं बल्कि नैतिकता ध्यान और प्रज्ञा पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को अज्ञान और तृष्णा से मुक्त कर निर्वाण प्राप्त करना है। यह मार्ग मध्य मार्ग कहलाता है जो अत्यधिक भोग और अत्यधिक तपस्या दोनों से दूर रहने की शिक्षा देता है। बुद्ध ने समानता अहिंसा और करुणा पर जोर दिया जो आज भी प्रासंगिक हैं। उनके धम्म ने लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।
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