भक्ति योग स्वामी विवेकानंद द्वारा रचित एक आध्यात्मिक ग्रंथ है जिसमें उन्होंने भक्ति यानी ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण को मोक्ष का एक सरल और प्रभावशाली मार्ग बताया है। इस पुस्तक में स्वामी जी ने बताया है कि सच्ची भक्ति आत्म-समर्पण श्रद्धा और ईश्वर में अटूट विश्वास से उत्पन्न होती है।उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भक्ति किसी अंधविश्वास या अंधानुकरण का नाम नहीं बल्कि यह एक उच्च मानसिक अवस्था है जिसमें भक्त अपने अहं को छोड़कर ईश्वर में एकत्व का अनुभव करता है। भक्ति योग यह सिखाता है कि प्रेम ही सबसे महान शक्ति है और ईश्वर की प्राप्ति प्रेम और सेवा के माध्यम से संभव है।चाहो तो मैं इसके प्रमुख अध्याय या विचार भी साझा कर सकता हूँ।