उस सत्य को जो हमारे हृदय की धड़कन धड़कन में बसा है। उस सत्य को जो हमारी चेतना की तहों में सोया है। वह जो हमारा होकर भी हमें भूल गया है। उसका पुनमरण उसकी पुनरुद्घोषणा भारत है। ओशोजैसा ओशो ने भारत को समझा है ऐसा कोई भी नहीं समझा है। यह समझ बहुत तलों पर है : दार्शनिक ऐतिहासिक शुद्ध भावनात्मक- और यहां तक कि राजनैतिक और साहित्यिक स्वतंत्र और आध्यात्मिक। ओशो की समझ सर्वग्राही है। एक ऐसी समझ जो शब्दों के पार जाती है—सच्चे प्रेम के अज्ञात लोक में। क्योंकि ओशो की सभी धारणाओं का आत्यंतिक केंद्र था प्रेम । यही उनका परम संदेश था जो उन्होंने हमारे लिए छोड़ा। जीवन की प्रेम के माध्यम से खोज अनुभूति और रसास्वादन। यह पुस्तक हमें उस प्रेम के दिशासूचक प्रदान करती है।