BHARAT : JANGAL KA BETA


LOOKING TO PLACE A BULK ORDER?CLICK HERE

Piracy-free
Piracy-free
Assured Quality
Assured Quality
Secure Transactions
Secure Transactions
Fast Delivery
Fast Delivery
Sustainably Printed
Sustainably Printed
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.
Review final details at checkout.

About The Book

हम सभी कहानियों से प्रेम करते हैं। कौन नहीं करता? बचपन में सुनी और सुनाई गई कहानियाँ ही तो हमारे बौद्धिक और वैचारिक यात्रा की नींव रखती हैं। ये कहानियाँ ही तो वो नाव हैं जिनकी सवारी कर हम पहली बार अपने सपनों के उस संसार से परिचित होते हैं जहाँ हमारे जीवन भर की इच्छाएँ और आकांक्षाएँ पलती और बड़ी होती हैं। यही तो वो धाराएँ हैं जिनमें बह कर हम पहली बार एक ऐसे काल्पनिक संसार की रचना कर पाने का हुनर पाते हैं जो हमारा अपना हो जिसके रचनाकार हम स्वयं हों। कालिदास कृत महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलम में वर्णित शकुंतला और दुष्यंत की प्रेम कहानी को कई तरह से सुनाया और नाट्य रूपांतरित किया गया मूलतः ये सभी कथाएँ और अनुवाद शकुंतला पर केंद्रित रहे हैं...किंतु मैंने जिस पात्र को अपने स्वप्नलोक में अपना मित्र बनाया वो भरत था... जिसकी चर्चा उन अनुवादों में केवल एक सिंह के दाँत गिनते हुए बालक के रूप में होती है। अगर इसके अतिरिक्त भी कुछ भरत के बारे में लिखा गया है तो मैं आज भी अनभिज्ञ हूँ। जब मैंने ये कहानी पहली बार सुनी थी तब मेरी उम्र कुछ ५-६ वर्ष होगी और तब मेरे लिए भरत की तरफ़ आकर्षित होने के कई कारण थे जिनमें एक उसका मेरी उम्र के समकक्ष होना था पर उससे भी बड़ा कारण ये था कि भरत ही वो बालक था जो आगे चल कर एक ऐसा प्रतापी और महान राजा बना जिसके नाम से प्रेरणा ले कर हमारे देश को भारत कहा गया।
downArrow

Details