यह केवल आधा सच है यदि हम यह मान लें कि पुलिस अकेले ही समाज में कानून और व्यवस्था की समस्याओं को सफलतापूर्वक नियंत्रित कर सकती है। सच्चाई का दूसरा पहलू यह है की समग्र आपराधिक न्याय प्रणाली और आम जनता दोनों ही समाज में शांति बनाए रखने की इस बड़ी ज़िम्मेदारी को समान रूप से साझा करते हैं। इस पुस्तक में हमने इस बात पर प्रकाश डालने की कोशिश की है कि अगर पुलिस कुछ पेशेवर दिशा-निर्देशों और मनोवैज्ञानिक उपायों का ईमानदारी से पालन करती है तो पुलिस कुशलता से सामाजिक तनावों और गड़बड़ियों को रोक सकती है और प्रबंधित कर सकती है। हमें उम्मीद है कि हमारे प्रयास से सार्वजनिक शांति और सामाजिक सद्भाव के व्यापक हित में कानून और व्यवस्था प्रबंधन में सभी भागीदारों को लाभ होगा। - बी. मरिया कुमार -डॉ. राजीव सिंह