तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगे<br>जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे<br>संग-संग तुम भी गुनगुनाओगे<br>ऊपर लिखे हजरत जयपुरी के शब्दों को लता मंगेशकर जी ने अमर कर दिया। ऐसे ही हजारों गाने हैं जिनको अपनी आवाज देकर उन्होंने जिंदा किया है। इनकी जीवनी आपको संगीतमय दुनिया के पीछे की दास्ताँ बताएगी जिन्हें सर्वाधिक गाने के लिए 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' भी दिया गया है। 2001 में इन्हें 'भारत रत्न' से भी अलंकृत किया गया। लता जी के जीवन को समीप से देखना हो तो सुदर्शन भाटिया द्वारा लिखित यह जीवनी आपको पसंद आयेगी। यह पुस्तक आपको किस्से-कहानियों की तरह गुनगुनाती चली जाएगी यह आपको पता भी नहीं चलने देती कि आप पुस्तक पढ़ रहे हैं ऐसा लगेगा मानो आप किस्से सुन रहे हैं। लता जी के बारे में सुनना और पढ़ना हर पाठकगण के लिए सुखदाई हो सकता है क्योंकि इतनी महान हस्ती के बारे में जानना और समझना अपने आपको और समृद्ध करने जैसा है। इसी आशा के साथ इस पुस्तक को पाठकगण को सौंपते हैं।
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