घोर कष्टों अभावों संकटों और भयावह अपमानों में जीते हुओं के बीच से उठकर दूसरों को भी उठाने का प्रयास करना संतों के जीवन का अभियान रहा। उन्होंने स्वयं भी आर्थिक अभाव के घोर संकट सहे दूसरों को भी अर्थाभाव में पिसते-टूटते देखा किंतु सबको सबसे पहले धनवान बनने की सीख नहीं आत्मवान बनने की सीख दी। अमीर खुसरो से लेकर कबीर तक न जाने कितने संतों ने अपने संदेश से पूरी दुनिया को प्रेम की अविरल धारा से लोगों को जोड़ा। प्रस्तुत पुस्तक में भारत के प्रमुख संतों के जीवन और संदेश को संकलित किया गया है।<br>इस पुस्तक के लेखक एवं हिंदी के विख्यात कवि आलोचक नाटककार पत्रकार व संपादक डॉ. बलदेव वंशी का नाम हिंदी के क्षेत्र में जाना-पहचाना नाम है। उन्होंने बारह कविता संग्रह बारह आलोचना/समीक्षा पुस्तकें एक नाटक सहित संतों पर दो ग्रंथावलियां- संत मलूक ग्रंथावली संत दादू ग्रंथावली संत सहजोबाई एवं संत मीराबाई पदावली सहित दर्जन भर पुस्तकों का लेखन एवं संपादन किया है। उन्हें शिरोमणि शिखर सम्मान (2004) पंजाब सरकार साहित्यकार सम्मान (2004) दिल्ली सरकार साहित्य भूषण पुरस्कार (2003) उत्तर प्रदेश सरकार सहित कबीर शिखर सम्मान एवं संत मलूक रत्न पुरस्कार के साथ अनेक सम्मान एवं पुरस्कार मिल चुके हैं।<br>इसके अलावा विश्व रामायण सम्मेलन मॉरीशस (1989) बेल्जियम (1991) सहित इंगलैंड हॉलैंड नेपाल आदि विदेशों में तथा देश में कबीर चेतना यात्रा आदि सहित अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्राएं की हैं। डॉ. वंशी भाषा संरक्षण संगठन के संस्थापक अध्यक्ष विश्व कबीरपंथी महासभा के अध्यक्ष अखिल भारतीय श्री दादू सेवक समाज के महानिदेशक हैं।<br>डॉ. बलदेव वंशी (एम.ए. हिन्दी पी.ए.डी.) संप्रति में श्री अरविंद महाविद्यालय (सांध्य) मालवीय नगर नई दिल्ली (दिल्ली विश्वविद्यालय) के कार्य संपन्न रीडर हैं।