इस कहानी की प्रेरणा मुझे तब मिली जब पिछले साल 2019 को मैं कहीं से वापस आ रही थी।बस में मेरी पिछली सीट पर दो युवक आपस में बैठकर बातें कर रहे थे। उनमें से एक युवक बहुत दुखी होकर अपने दोस्त को यह बता रहा था कि वह एमबीए करना चाहता है पर उसकी पढ़ाई का खर्च बहुत अधिक है। इसलिए वह कोई दूसरा कोर्स या आगे की पढ़ाई ऐसे ही कर लेगा। तब उसका दोस्त उसे समझाते हुए कहा कि आजकल तो पढ़ाई के लिए बैंक से लोन भी मिलता है। बस यही सुन मेरे दिमाग में इस कहानी की पृष्ठभूमि तैयार हो गई। इस कहानी के द्वारा मैं यह दिखाना चाहती हूं कि यदि हमसे कोई भी जाने अनजाने भूल हो जाए तो हमें उसका प्रायश्चित अवश्य करना चाहिए।