बिखरे मोती एक प्रयास है गज़ल और कविता के अनेक मोतियों को एकत्रित कर उन्हें एक सूत्र में पिरोने का जिस से भाँतिभाँति के रंगीन मोतियों से बनी माला अपने विभिन्न रंगों की छटा सब ओर बिखेरे। जीवन की विविधता समेटे ये रचनाएं एक अनूठा सा दर्द और टीस लिए हैं जो बिछड़ने की वेदना तो दर्शाती ही हैं किन्तु साथसाथ एक आशा भी जगाती हैं पुनः मिलने की। खुशियाँ बांट लेना तो आसान है परन्तु दुख बांटना बहुत कठिन!इन रचनाओं में कहीं जीवन के सजीव संस्मरण हैं तो कहीं निर्जीव जीवनियाँ दुख और उम्मीदों से भरी ये रचनाएं यथार्थ से तो जोड़ती ही है साथसाथ एक हल्की सी नमी आंखों को दे जाती हैं जो व्यक्ति के संवेदनशील होने का प्रमाण है।