Bole Sheikh Farid : Farid Vaani (???? ??? ???? : ???? ????)) & Jyotish Vigyan
Hindi

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बोले शेख फरीद : फरीद वाणीशेख फरीद प्रेम के पथिक हैं। और जैसा गीत फरीद ने गाया है वैसा किसी ने नहीं गाया। कबीर भी प्रेम की बात करते हैं लेकिन ध्‍यान की भी बात करते हैं। दादू भी प्रेम की बात करते हैं लेकिन ध्‍यान की बात को बिलकुल भूल नहीं जाते। नानक भी प्रेम की बात करते हैं लेकिन वह ध्‍यान से मिश्रित हैं। फरीद ने शुद्ध प्रेम के गीत गाए हैं ध्‍यान की बात ही नहीं की है प्रेम में ही ध्‍यान जाना है। इसलिए प्रेम की इतनी शुद्ध कहानी कहीं और न मिलेगी। फरीद खालिस प्रेम हैं। प्रेम को समझ्‍ लिया तो फरीद को समझ लिया। फरीद को समझ लिया तो प्रेम को समझ लिया। प्रस्‍तुत पुस्‍तक में फरीद-वाणी पर ओशो द्वारा दिए प्रवचनों को संकलित किया गया है। यह पुस्‍तक पाठकों के लिए प्रेम और ज्ञान के नए क्षितिज खोलती है।ज्योतिष विज्ञानएक जिसे हम कहें अनिवार्य एसेंशियल जिसमें रत्ती भर फर्क नहीं होता। वही सर्वाधिक कठिन है उसे जानना। फिर उसके बाहर की परिधि है : नॉन-एसेंशियल जिसमें सब परिवर्तन हो सकते हैं। मगर हम उसी को जानने को उत्सुक होते हैं। और उन दोनों केबीच में एक परिधि है - सेमी- एसेंशियल अर्द्ध अनिवार्य जिसमें जानने से परिवर्तन हो सकते हैं न जानने से कभी परिवर्तन नहीं होंगे। तीन हिस्से कर लें। एसेंशियल जो बिलकुल गहरा है अनिवार्य जिसमें कोई अंतर नहीं हो सकता। उसे जानने के बाद उसके साथ सहयोग करने के सिवाय कोई उपाय नहीं है। धर्मों ने इस अनिवार्य तथ्य की खोज के लिए ही ज्योतिष की ईजाद की उस तरफ गए। उसके बाद दूसरा हिस्सा है: सेमी-एसेंशियल अर्द्ध अनिवार्य । अगर जान लेंगे तो बदल सकते हैं अगर नहीं जानेंगे तो नहीं बदल पाएंगे। अज्ञान रहेगा तो जो होना है वही होगा। ज्ञान होगा तो ऑल्टरनेटिव्स हैं विकल्प हैं बदलाहट हो सकती है। और तीसरा सबसे ऊपर का सरफेस वह है: नॉन एसेंशियल । उसमें कुछ भी जरूरी नहीं है । सब सांयोगिक है।
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