इस कहानी में एक वृद्ध औरत तिरस्कार और अपमान का जीवन जीती है । भतीजे बुद्धिराम के तिलक के समय सारा घर मिठाई पूरी कचौरी की सुगंध से भर जाता है। काकी भूखी प्यासी उपेक्षित सी कोठरी में पड़ी रहती है वह कुछ खा नहीं पाती है। बुजुर्ग को आदर देना चाहिए यही इस कहानी की शिक्षा है|