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Description
Author
मधुवन में भाँति भाँति के फूल खिले रंग रूप में एक नहीं चाल ढाल से अलग थलग एक धरा से जुड़े मगर एक साथ ये पले बढ़े फिर जग क्यूँ मेरे तेरे में जिया करे जाति धरम में अलग अलग बोली करम में अलग अलग ये मुझसे वो तुझसे ये ज़्यादा ज़्यादा वो थोड़ा कम ये तेज़ बड़ा वो मध्यम ये धनवान बड़ा वो निर्धन अपने पराये से ऊपर उठकर तुम हर जीवन को खुशहाल करो अपनत्व का भाव जगा कर तुम हर जीवन में समान अधिकार भरो मेरा प्रेम स्वीकार करो मेरा प्रेम स्वीकार करो