मधुवन में भाँति भाँति के फूल खिले रंग रूप में एक नहीं चाल ढाल से अलग थलग एक धरा से जुड़े मगर एक साथ ये पले बढ़े फिर जग क्यूँ मेरे तेरे में जिया करे जाति धरम में अलग अलग बोली करम में अलग अलग ये मुझसे वो तुझसे ये ज़्यादा ज़्यादा वो थोड़ा कम ये तेज़ बड़ा वो मध्यम ये धनवान बड़ा वो निर्धन अपने पराये से ऊपर उठकर तुम हर जीवन को खुशहाल करो अपनत्व का भाव जगा कर तुम हर जीवन में समान अधिकार भरो मेरा प्रेम स्वीकार करो मेरा प्रेम स्वीकार करो