यह भगवान बुद्ध का मानव कल्याण के लिये दिया गया एक अद्भुत रतन है। हम अब तक इसका सही मूल्यांकन नहीं कर पाये हैं। हम इस सूत्र को दोहराते भर हैं। इस सूत्र को हमने कभी खोलकर (विश्लेषण) नहीं देखा है। हमने कभी भी इस रतन को अपनाने की तो बात ही दूर रही कभी ढंग से ध्यान भी नहीं दिया है। क्या हमने कभी इस हीरे को उलट पुलट कर देखा है ? यह एक मात्र वचन ही हमारी कायापलट करने में सक्षम है। यह व्यक्ति के सर्वांगीण विकास का मन्त्र ह। आओ समझो कैसे ?...