इस प्रकाशन का सन्दर्भ विश्व धरातल पर बढ़ते मैत्री संबंधों के आलोक में मानव से मानव के संबंधों और उस प्रक्रिया को सहारा देने वाले तत्वों को सरल भाषा में समझने से है | कोई भी मानवतावादी धर्म और विचार प्रणाली कभी भी मानव के बीच में हिंसा तनाव आदि तत्वों को पनपने देने के पक्ष में विचार नहीं रख सकता फिर ऐसा क्या कारण है कि जागतिक स्तर पर अस्थिरता को बढ़ते हुए देखा जा रहा है? ऐसे कौन से तत्व हैं जो हिंसा का पोषण कर रहे हैं? ऐसे और भी कई प्रश्नों को तलाशते समय हमें इस प्रकाशन को सन्दर्भीत करने का विचार मन में आया |