“...अब जरा गोर से देखो आश्चर्य होता आज जब हम 2600 वर्ष बाद विज्ञान से परिचित होते हैं। विज्ञान आज वही भाषा बोल रहा है जो बुद्ध ने बोली है। मैं बुद्ध को आधुनिक विज्ञान का जनक कहता हूं। परन्तु दोनो के कार्य क्षेत्र अलग हैं। बुद्ध ने आन्तरिक जगत में खोज की और व्यक्ति को मन की जंजीर रूपी बन्धन से मुक्त कराया। विज्ञान ने बाहिय जगत में शरीर को साधन सम्पन्न कर श्रम से मुक्त कराया। पहली बात सारा विज्ञान का क्षेत्र कारण और उसका प्रभाव (Cause and Effect ) पर ही तो आधारित है। बुद्ध ने ही तो सबसे पहले कार्य कारण (प्रतित्य-समुत्पाद) प्रतित्य माने कारण समुत्पाद माने उत्पन्न होने का सिद्धान्त खोजा है। बुद्ध से पहले कोई भी व्यक्ति इसे खोज नहीं पाया। इसलिये बुद्ध ही आधुनिक साईंस के जनक हैं।..“